काव्यात्मक सफर: गुलज़ार की कालजयी शायरी से लेकर अमेरिका की सड़कों तक, शब्दों का अनूठा उत्सव

साहित्य और कला की दुनिया में कविता का स्थान हमेशा से सर्वोच्च रहा है। चाहे वह भारत के दिग्गज गीतकार गुलज़ार साहब की रूह को छू लेने वाली शायरी हो, या फिर सात समंदर पार अमेरिका के वर्मोंट में आयोजित होने वाला सामुदायिक काव्य उत्सव, शब्दों का जादू हर जगह कायम है। आज हम न केवल गुलज़ार साहब की कुछ चुनिंदा और बेहतरीन रचनाओं पर नज़र डालेंगे, बल्कि यह भी जानेंगे कि कैसे अप्रैल २०२६ में कविता प्रेमियों के लिए एक नया वैश्विक मंच तैयार हो रहा है।

गुलज़ार: जज़्बातों के चितेरे

भारतीय सिनेमा और साहित्य जगत में गुलज़ार एक ऐसा नाम है जिससे शायद ही कोई अपरिचित हो। दर्शकों ने उनकी बनाई फिल्में देखी हैं, उनके लिखे संवादों को सराहा है और गीतों को भरपूर प्यार दिया है। लेकिन फिल्मी चकाचौंध से इतर, गुलज़ार साहब की नज़्में और ग़ज़लें एक अलग ही दुनिया की सैर कराती हैं। उनकी कलम से निकली पंक्तियां रिश्तों की बारीकियों और वक्त की नज़ाकत को बखूबी बयां करती हैं।

हाल ही में उनकी शायरी के कुछ नायाब नमूने चर्चा में रहे हैं, जो मानवीय संवेदनाओं की गहराई को दर्शाते हैं। रिश्तों में आए बदलाव और अकेलेपन को उन्होंने कुछ यूं बयां किया है: “आँखों से आँसुओं के मरासिम पुराने हैं, मेहमाँ ये घर में आएँ तो चुभता नहीं धुआँ।” वहीं, जीवन की विडंबनाओं पर उनका यह शेर दिल को झकझोर देता है: “दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई, जैसे एहसान उतारता है कोई।”

उनकी रचनाओं में वक्त का ज़िक्र बार-बार आता है। कभी वे कहते हैं, “वो उम्र कम कर रहा था मेरी, मैं साल अपने बढ़ा रहा था,” तो कभी बीती यादों को कुरेदते हुए लिखते हैं, “कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था, आज की दास्ताँ हमारी है।” गुलज़ार की शायरी में प्रकृति और मानवीय मन का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जैसे: “काई सी जम गई है आँखों पर, सारा मंज़र हरा सा रहता है।”

चाहे वह अकेलेपन का एहसास हो—“काँच के पीछे चाँद भी था और काँच के ऊपर काई भी, तीनों थे हम वो भी थे और मैं भी था तन्हाई भी”—या फिर किसी की कमी का अहसास—*”शाम से आँख में नमी सी है, आज फिर आप की कमी सी है”—गुलज़ार साहब हर जज़्बात को शब्द देने में माहिर हैं।

वर्मोंट में कविताओं का नया सवेरा

जहां एक तरफ गुलज़ार साहब के शब्द दिलों में जगह बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के वर्मोंट में स्थानीय कवियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का एक सुनहरा अवसर सामने आया है। एक हालिया सामुदायिक घोषणा के अनुसार, वर्मोंट के कवियों को अप्रैल २०२६ में होने वाले ‘पोयमटाउन रैंडोल्फ’ (PoemTown Randolph) उत्सव के लिए अपनी मौलिक रचनाएं भेजने के लिए आमंत्रित किया गया है।

यह आयोजन राष्ट्रीय कविता माह (National Poetry Month) के जश्न के रूप में मनाया जाएगा। ‘पोयमटाउन रैंडोल्फ’ अपने १३वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और इस बार भी रैंडोल्फ की सड़कों और नदी के किनारे बने रास्तों (river trail) पर चुनी गई कविताओं को खिड़कियों में प्रदर्शित किया जाएगा।

प्रकाशन और भागीदारी के नियम

आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि चयनित कविताओं को न केवल प्रदर्शित किया जाएगा, बल्कि उन्हें “पोयमटाउन रैंडोल्फ २०२६” नामक वार्षिक संकलन (Anthology) में भी प्रकाशित किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए कुछ नियम तय किए गए हैं:

  • कवि केवल अपनी मौलिक रचनाएं ही भेज सकते हैं।

  • प्रत्येक कवि अधिकतम दो कविताएं भेज सकता है।

  • हर कविता की लंबाई २४ पंक्तियों तक सीमित होनी चाहिए।

  • भेजी गई कविताएं पहले किसी भी ‘पोयमटाउन’ या ‘पोयमसिटी’ कार्यक्रम में प्रदर्शित नहीं होनी चाहिए।

प्रविष्टियां भेजने की अंतिम तिथि १५ फरवरी, २०२६ निर्धारित की गई है। कवियों को अपनी रचनाएं ईमेल के माध्यम से भेजनी होंगी। सबमिशन में कवि का नाम और उनके शहर का नाम सबसे नीचे होना चाहिए (शहर के नाम के साथ ‘VT’ न लिखें)। इसके अलावा, ईमेल के मुख्य भाग में कवियों को अपना नाम, डाक का पता, ईमेल पता और फोन नंबर देना अनिवार्य है।

तकनीकी सहायता और अनुदान

आयोजकों ने उन कवियों का भी ध्यान रखा है जिनके पास ईमेल की सुविधा नहीं है। ऐसे रचनाकार १५ फरवरी, २०२५ तक जेनेट वॉटसन से ८०२-७२८-९४०२ पर संपर्क कर सकते हैं ताकि वे अपनी कविताएं जमा करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें।

इसके साथ ही, लेखकों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘राइटर ग्रांट्स’ (लेखक अनुदान) की भी घोषणा की गई है। यह तीसरा साल है जब यह अनुदान दिया जा रहा है। ऐसे कवि जिन्होंने पिछले दो वर्षों में यह अनुदान प्राप्त नहीं किया है, वे इसके लिए आवेदन करने के पात्र हैं। अनुदान आवेदन की समय सीमा २८ फरवरी रखी गई है।

स्वीकृत कविताएं अपने आप प्रिंट संकलन में शामिल कर ली जाएंगी। यदि कोई कवि अपना काम संकलन में शामिल नहीं करवाना चाहता, तो उसे सबमिशन ईमेल में इसका स्पष्ट उल्लेख करना होगा। यह पहल वर्मोंट में रहने वाले किसी भी उम्र के कवियों के लिए खुली है, जिसका मुख्य उद्देश्य साहित्यिक अभिव्यक्ति के माध्यम से समुदाय की भावना को बढ़ावा देना और कविता को आम लोगों तक पहुंचाना है।

चाहे वह गुलज़ार की शायरी की गहराई हो जो कहती है “कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ, उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की,” या फिर रैंडोल्फ की सड़कों पर सजने वाली नई कविताएं, यह स्पष्ट है कि साहित्य ही वह माध्यम है जो “वक़्त की शाख़ से लम्हे” तोड़कर उन्हें अमर बना देता है।

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