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कोर्ट ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला, अलग रहने के लिए अड़ी पत्नी को उसके पति को दस हजार रुपए देने का आदेश, जानिए क्या है पूरा मामला?

कोर्ट ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला, अलग रहने के लिए अड़ी पत्नी को उसके पति को दस हजार रुपए देने का आदेश, जानिए क्या है पूरा मामला?

 

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अहमदाबाद : जब भी कोई तलाक का मामला होता है। हम सभी जानते है की अक्सर पति अपनी पत्नी को निर्वाह निधि (Alimony) देते हुए देखा है। हालाँकि इस बार गुजरात के अहमदाबाद में ऐसा मामला सामने आया है। जिसमे कोर्ट ने महिला को अपने पति को दस हजार का भुगतान करने को कहा है। 

एक महिला जिसने अपने पति को सिर्फ इसलिए छोड़ दिया क्योंकि वह एक अलग जाति से है. गौरतलब है कि पति-पत्नी के बीच कोई अनबन नहीं थी और पत्नी को पति से कोई शिकायत नहीं थी. हालांकि, गुजरात उच्च न्यायालय ने पत्नी को अपने पति को रु. 10,000 का भुगतान करने का आदेश दिया गया है।

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माता-पिता के दबाव में 

अदालत ने पाया कि पत्नी ने अपने पति को तलाक देने के लिए जिस आधार का इस्तेमाल किया वह अनुचित था। इस प्रकार का कारण टिकाऊ नहीं है। हालांकि इन सभी कार्यवाही के दौरान जब जज के सामने पति भावनात्मक रूप से टूट गया था, वही पत्नी अपने फैसले पर अड़ी रही।

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महिला ने नाराजगी के साथ अदालत को बताया कि उसने अपने माता-पिता के दबाव में ऐसा फैसला किया है। महिला ने कहा कि उसके माता-पिता रिश्ते से नाखुश थे क्योंकि उसका पति दूसरी जाति का था।

चार साल रिलेशनशिप 

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 साबरकांठा जोड़े ने चार साल तक रिलेशनशिप में रहने के बाद इस साल की शुरुआत में शादी कर ली। चार दिन पति-पत्नी के रूप में साथ रहने के बाद महिला अपने माता-पिता के पास गई और फिर कभी नहीं लौटी। पति ने अधिवक्ता हिमानीश जापी के माध्यम से अपनी पत्नी की कस्टडी के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दी थी, जिसके बाद कोर्ट ने महिला को तलब किया था।

न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, ”याचिकाकर्ता अपनी सारी आशाओं, आकांक्षाओं और सपनों के साथ इस अदालत में आया था। हमारा दृढ़ मत है कि बताया गया है कि महिला द्वारा दिया गया कारण अनुचित और अनौपचारिक है। हम महिला को आदेश देते है की याचिकाकर्ता को दस हजार का भुगतान करे।”

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