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युद्ध चल रहा है यूरोप में और भुगत रहा है भारत, अब रूपया हुआ ‘इतना’ कमजोर, जानिए विस्तार से

युद्ध चल रहा है यूरोप में और भुगत रहा है भारत, अब भारत रूपया हुआ ‘इतना’ कमजोर, जानिए विस्तार से

नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमतों के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचने से रुपया आज भारी दबाव में है। रुपया आज सुबह डॉलर के मुकाबले 81 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 76.98 पर खुलारूस-यूक्रेन संकट ने नया मोड़ ले लिया है। इससे वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसने निवेशकों को सुरक्षित निवेश के लिए आकर्षित किया है।

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 सुबह 10.45 बजे डॉलर इंडेक्स 0.20 फीसदी बढ़कर 98.85 पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 99.22 के स्तर को भी छू गया। यह सूचकांक विश्व की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाता है।

विदेशी मुद्रा व्यापारियों का कहना है कि रूसी तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी की जा रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप और अन्य सहयोगी रूस से कच्चे तेल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। 

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रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक है और प्रतिदिन 5-6 मिलियन बैरल तेल का निर्यात करता है। इसका आधा हिस्सा अकेले यूरोप को जाता है। यदि तेल निर्यात पर प्रतिबंध हटा दिया जाता है, तो यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में मुद्रास्फीति मजबूत होगी, जिसका प्रभाव शेष विश्व पर पड़ेगा।

इससे पहले दिन में रुपया 23 पैसे गिरकर 76.17 पर बंद हुआ था। यह 15 दिसंबर 2021 के बाद का सबसे निचला स्तर था। रुपये में गिरावट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रिलायंस सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक श्रीराम अय्यर ने कहा, ‘डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल में तेजी की वजह से रुपये का अवमूल्यन हो रहा है।

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