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Russia Ukraine Crisis : ‘यह’ है 5 पॉइन्ट; जिस वजह से भारत चाहकर भी रूस का विरोध नहीं कर सकता

नई दिल्ली :

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध (Russia-Ukraine War) का आज सातवां दिन है। 40 मील दूरी तक फैला रूसी टैंकों और अन्य वाहनों का काफिला धीरे-धीरे कीव (Kyiv) की ओर बढ़ रहा है। वहीं, यूक्रेन के दूसरे शहर खारकीव (Kharkiv) में भी रूस (Russia) का हमला तेज हो गया है। रूसी पाराट्रूपर्स खारकीव में उतरे हैं और सेना के मेडिकल सेंटर पर हमला कर दिया है. यूक्रेन (Ukraine) की सेना भी डटकर रूसी हमलों का जवाब दे रही है। देश की राजधानी कीव में करीब 30 लाख लोग रहते हैं।

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यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों के लिए भारत सरकार की ओर से कंट्रोल रूम एक्टिव किए गए हैं। ये कंट्रोल रूम पोलैंड, रोमानिया, हंगरी और स्लोवाक गणराज्य में स्थापित किए गए हैं। ये देश यूक्रेन से सीमा सांझा करते हैं।

एक तरफ जहां पूरा यूरोप और पश्चिमी देश रूस के खिलाफ हो चुके हैं तब भी भारत अपनी स्थिति को तटस्थ बनाए हुए है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वो कौन से कारण हैं जिसकी वजह से भारत चाहकर भी रूस के खिलाफ नहीं जा सकता? कौन सी वजहें हैं जिसके कारण भारत रूस का विरोध नहीं कर पा रहा?

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  • हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के दखल को रोकने के लिए अमेरिका को रणनीतिक रूप से भारत के साथ की जरूरत है. ऐसे में भारत और अमेरिका, दोनों ही देश किसी भी हाल में एक-दूसरे से दूर जाने के जोखिम को उठाना नहीं चाहेंगे।
  • वर्तमान में रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है.ऐसे में भारत किसी भी सूरत में रूस के खिलाफ जाकर अपने रिश्तों की बलि नहीं चढ़ाना चाहेगा।
  • भारत के सामने यूक्रेन में फंसे हजारों भारतीय नागरिकों को निकालने की भी चुनौती है, जिनमें ज्यादातर छात्र हैं. ऐसे में अगर भारत का रुख किसी भी एक देश की तरफ झुका दिखता है तो वहां मौजूद भारतीय नागरिकों के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है और भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने का जोखिम नहीं उठाना चाहेगा।
  • रूस को अगर भारत के रूख में बदलाव दिखा तो वो भी अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए, भारत पर दबाव बना सकता है, जिसमें भारत के कट्टर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के के खिलाफ एक मंच पर खड़ा होना शामिल है।
  • अगर अमेरिका रूस पर पाबंदियां लगाता है तो भारत के लिए रूस से हथियारों को आयात करने में कुछ चुनौतियां आ सकती हैं। अमेरिका, भारत पर रूस से हथियार आयात न करने के लिए दबाव बढ़ा सकता है।

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