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नागपुर सत्र न्यायलय का महत्वपूर्ण निर्णय, सहमति से यौन संबंध मतलब बलात्कार नहीं; जानिए क्या था पूरा मामला?

नागपुर: यदि कोई समझदार और बालिग महिला  अपनी अर्जी से किसी के साथ सहमति से यौन संबंध बनाती है । बाद में अगर किसी कारण से रिश्ता आगे नहीं बढ़ता और टूट जाता है, तो आदमी को बलात्कार या शोषण का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। नागपुर, महाराष्ट्र के सत्र न्यायालय ने यह महत्वपूर्ण फैसला दिया है।

न्यायाधीश सुनील पाटिल ने एक मामले की सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया। इस मामले का आरोपी सागर एक निजी कंपनी में काम करता है। लेकिन उससे पहले पढ़ाई के दौरान ही उसकी एक लड़की से जान पहचान हो गई। मुलाकात  दोस्ती में बदली और फिर दोस्ती प्यार में बदल गई। इसके बाद दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए।

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सागर का विचार संबंधित महिला से शादी करने का था। हालाँकि।सागर के परिवार वालों ने उसका विरोध किया। इसलिए सागर अपनी प्रेमिका से शादी नहीं कर सके। सागर के माता-पिता ने लड़की को दुल्हन के रूप में स्वीकार नहीं किया। सागर के शादी से इंकार करने पर संबंधित महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने थाने में अपनी शिकायत में कहा कि सागर ने महिला को धोखा दिया है और उसके साथ सागरने दुष्कर्म किया।

मामला थाने से कोर्ट पहुंचा। दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी दलीलें पेश कीं। सागर के वकील आरके तिवारी ने अदालत को बताया कि संबंधित महिला ने उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बनाए थे। सागर ने कोई जबरदस्ती नहीं की है। सागर का इरादा धोखा देने का नहीं था। उसका इरादा शादी करने का था। वहीं सागर ने शादी का वादा भी नहीं किया।

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सागर के वकील का दावा कोर्ट में साबित हुआ। अदालत ने सागर को आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि एक बालिग और समझदार महिला के साथ उसकी सहमति से संभोग करना शोषण या बलात्कार नहीं माना जाएगा।

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