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Driving Licence Rules Update:

नई दिल्ली: जैसे की हम सभी जानते है दुनिया के किसी भी देश में गाडी चलाना हो तो सबसे महत्वपूर्ण दस्तऐवज ड्रायविंग लायसेंस  होता है। अगर आप के पास लायसेंस होगा तभी आपको रोड पर गाडी चलाने की अनुमति दी जाती है।

हालाँकि भारत में ड्रायविंग लायसेंस पाने की प्रोसेस काफी लंबी और असुविधाजनक है। इसलिए अक्सर हम देखते है की लोग बिना लायसेंस ही गाडी चलाते है। इस वजह देश में रोज हजारों लोगों का चालान कटता है और कई दुर्भाग्यपूर्ण हादसे भी होते है।

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इसी बिच ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की सोच रहे हो तो आपके लिए काफी महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। अब लायसन्स पाने के लिए आपको रीजनल ट्रांसपोर्टेशन ऑफिस (RTO) के चक्कर लगाने के लिए लंबी लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। केंद्र सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नियमों को बेहद आसान बना दिया है।

अब ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ड्राइविंग टेस्ट की जरूरत नहीं होगी। ड्राइविंग लाइसेंस के नियमों में किए गए संशोधन के मुताबिक अब आपको आरटीओ में जाकर किसी भी तरह का ड्राइविंग टेस्ट देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इन नियमों को अधिसूचित किया है, इन नियमों को भी लागू किया गया है। यह उन लोगों के लिए बड़ी राहत होगी जो ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आरटीओ की वेटिंग लिस्ट में हैं।

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क्या कहता है नया नियम?
प्रशिक्षण केंद्रों को लेकर सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की ओर से कुछ दिशा-निर्देश और शर्तें हैं। इसमें प्रशिक्षण केंद्रों के क्षेत्र के प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण शामिल है। आइए विस्तार से समझते हैं…

1. अधिकृत एजेंसी यह सुनिश्चित करेगी कि दो पहिया, तिपहिया और हल्के मोटर वाहनों के प्रशिक्षण केंद्रों के पास कम से कम एक एकड़ जमीन होनी चाहिए। मध्यम और भारी यात्री माल वाहनों या ट्रेलरों के लिए  लिए आवश्यक दो एकड़ जमीन होनी चाहिए।

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2. ट्रेनर को कम से कम 12वीं पास होना चाहिए और कम से कम पांच साल का ड्राइविंग अनुभव होना चाहिए, जो ट्रैफिक नियमों से अच्छी तरह वाकिफ हो।

3. मंत्रालय ने एक शिक्षा पाठ्यक्रम भी निर्धारित किया है। हल्के मोटर वाहन चलाने के लिए, पाठ्यक्रम की अवधि अधिकतम 4 सप्ताह होगी जो 29 घंटे तक चलेगी। इन ड्राइविंग सेंटरों के पाठ्यक्रम को 2 भागों में बांटा जाएगा। इसमें थेरोटिकल और प्रैक्टिकल शिक्षा भी शामिल है। 

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4. लोगों को बुनियादी सड़कों, ग्रामीण सड़कों, राजमार्गों, शहर की सड़कों, रिवर्सिंग और पार्किंग, उतार-चढ़ाव आदि पर गाड़ी चलाना सीखने में कम से कम 21 घंटे खर्च करने पड़ेंगे।  थ्योरी भाग में सड़क शिष्टाचार, रोड रेज, यातायात शिक्षा, दुर्घटनाओं के कारणों को समझना, प्राथमिक चिकित्सा आदि शामिल है।

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