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Budget 2022 : मोदी सरकारने तोड़ दी बजट की ‘ये’ 5 परंपराएं

नई दिल्ली :

2014 में प्रधानमंत्री का पद संभालने वाले नरेंद्र मोदी ने कई अहम फैसले लिए। कुछ फैसलों का देशभर में स्वागत हुआ तो कुछ का कड़ा विरोध हुआ। परंपराओं को बदलने का सरकार का रवैया बना रहा। कुछ परंपराएं केंद्रीय बजट से जुड़ी थीं, जिन्हें मोदी के कार्यकाल में भी बदला गया।

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ब्रिटिश काल से हर साल 28 फरवरी को बजट पेश किया जाता रहा है, लेकिन अब इसे 1 फरवरी को पेश किया जा रहा है।2017 में, प्रधान मंत्री मोदी के कार्यकाल के दौरान, तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 1 फरवरी को बजट पेश किया था। इस बदलाव के पीछे का कारण यह है कि बजट से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं नए वित्तीय वर्ष के शुरू होने से पहले पूरी कर ली जाएं।

पहले रेल बजट और आम बजट अलग-अलग पेश किया जाता था, लेकिन 1924 से चली आ रही यह परंपरा 2016 में टूट गई। इससे पहले, रेल बजट आम बजट से पहले संसद में पेश किया जाता था, लेकिन 2016 से रेल बजट केंद्रीय बजट का हिस्सा रहा है।

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1947 में जब पहली बार वित्त मंत्री आरसीकेएस चेट्टी द्वारा स्वतंत्र भारत में बजट पेश किया गया था, तो वह एक चमड़े के ब्रीफकेस में सभी बजट दस्तावेजों के साथ संसद पहुंचे थे, लेकिन 5 जुलाई, 2019 को, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट दस्तावेजों लाल रंग के कपडे में लेकर आई थी।वह 2021 में कोरोना महामारी के चलते टैबलेट भी लेकर आई थीं। इस बजट को डिजिटल बजट के रूप में जाना जाता था।

2015 में, मोदी सरकार ने योजना आयोग को समाप्त कर दिया और नीति आयोग की स्थापना की। साथ ही देश की पंचवर्षीय योजना भी समाप्त हो गई। ये योजनाएं देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय से शुरू हुई थीं, लेकिन 2017 में खत्म हो गईं।

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