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Cryptocurrency Fraud : क्रिप्टो घोटाला हुआ तो कुछ भी ना कर पायेगी सरकार; इन्व्हेस्टर होंगे खाली हाथ, जनिये विस्तार से

भारतीयों ने अब तक क्रिप्टोकरेंसी में 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। देश में कुल 4 क्रिप्टो एक्सचेंज काम कर रहे हैं। लेकिन ज्यादातर निवेशक इस बात से अनजान होते हैं कि कुछ गलत होने पर वे कानूनी रूप से कुछ नहीं कर सकते।

कानूनी विशेषज्ञ और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विराग गुप्ता दैनिक दिव्य मराठी एक आर्टिकल में कहा कि, यदि धोखाधड़ी वाले एक्सचेंज या क्रिप्टो व्यापारी भाग जाते हैं तो निवेशकों की बचत डूब सकती है। फिर इन्व्हेस्टर्स के पास के पास दो ही विकल्प होगे : 1) पुलिस में आपराधिक शिकायत दर्ज करें 2) अदालत में दीवानी मुकदमा दायर करना और एक्सचेंज या क्रिप्टो व्यापारी से मुआवजे की मांग करना।

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मात्र जिसपर संसद में ही कायदा न बना हो उसपर पोलीस क्या कर पायेगी? हमारा मानना है कि, क्रिप्टो बाजार में सुरक्षा जैसी कोई चीज नहीं है। यदि क्रिप्टो बाजार में हेरफेर किया जाता है, तो निवेशक निश्चित रूप से फस जाएगा। बैंकों, म्यूचुअल फंड या जिरोधा जैसे स्टॉक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च करने के लिए कंपनियों को विभिन्न प्रकार के लाइसेंस, पूछताछ और प्रतीक्षा अवधि से गुजरना पड़ता है।

ये सब क्रिप्टो बाजार में नही होता। क्रिप्टो बाजार में उथल-पुथल वर्तमान में सामने आ रही है। और बडी बात ये है की, आप अपनी हुये आर्थिक धोखे को कहा पे और कैसे सिद्ध करेंगे?

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आपके साथ धोखा होता है तो आपके पैसो का क्या हुआ? यह पूछने का कोई प्रावधान नहीं है।रिजर्व बैंक ने 2018 में एक सर्कुलर जारी कर क्रिप्टो ट्रेडिंग को अवैध करार दिया था। इसे सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में रद्द कर दिया था। तो क्रिप्टो पर प्रतिबंध हटा दिया गया था। कई निवेशक अपनी कमाई पर टैक्स भी दे रहे हैं। तो यह अवैध भी नहीं है। लेकिन आज तक केंद्र सरकार ने इसे कानून नहीं बनाया है। इस कारण घोटालों पर कार्रवाई करना लगभग नामुमकिन है।

निवेशकों ने अरबों रुपये का निवेश किया है। अगर अभी प्रतिबंध लगाया गया तो भ्रम की स्थिति पैदा होगी। निवेशकों को निवेश करने से पहले उचित सावधानी बरतने की जरूरत है और इस प्रोजेक्ट को अच्छी तरह से समझना चाहिए।

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