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Grape Rate Maharashtra: अंत में वही हुआ जिसका भय था; एक महीना पहलेही हुआ था द्राक्ष बागायत संघ का निर्णय

नासिक :

प्रकृति की बेरुखी के कारण अंगूर के बागों की हानि, उत्पादन में गिरावट और बाजार में कम दरों के कारण अंगूर के बागों को भारी नुकसान हो रहा था। अंगूर उत्पादक संघ (Grape Growers Association) ने इस साल पहली अंगूर दर निर्धारित करने का फैसला किया था क्योंकि किसानों को उत्पादन से अधिक खर्च करना पड़ा था। हालांकि, जिस नासिक जिले से यह अनूठी पहल शुरू हुई थी, उसी नासिक जिले में संघ के फैसले को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।

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अंगूर को निश्चित दर पर बेचने का निर्णय सर्वसम्मत था। अब जनवरी रेट 82 रुपये प्रति किलो है। लेकिन व्यापारियों ने नियम तोड़कर शेत शिवरा में 55 रुपये तक के अंगूर खरीदे। ऐसी शिकायतें अब दर्ज की जा रही हैं और देखना होगा की अंगूर उत्पादक संघ के फैसले का क्या होता है।

अंगूर उत्पादक संघ के बैठक में क्या तय हुआ :-

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ये दरें उत्पादन लागत के आधार पर न्यूनतम 10% लाभ पर आधारित हैं। जनवरी में न्यूनतम कीमत 82 रुपये प्रति किलोग्राम, फरवरी में 71 रुपये प्रति किलोग्राम और मार्च में 62 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित की गई थी। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया की, किस्म, रंग, आकार, गुणवत्ता के मानदंडों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित दर से अधिक दर पर किस्म को बेचा जाना चाहिए।

अंगूर की कीमत को लेकर यह ऐतिहासिक फैसला हुआ था, जिसे किसानों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया था। उम्मीद थी की, यह निर्णय एक नया मानक स्थापित करेगा। लेकिन अब जब अंगूर कम दाम पर बेचा गया है, तो यह देखना बाकी है की, किसान एकजुट रहेंगे या नहीं?

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अब जो हुआ है, उसके चलते एक और बैठक कर अंगूर उत्पादक संघ के फैसले को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस संबंध में रविवार को बैठक की जाएगी।

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