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BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप: पिछले 10 साल से कभी भी खाली हाथ वापस नहीं लौटा भारत

 

BWF विश्व चैम्पियनशिप: बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में भारत की पदक यात्रा 1983 में शुरू हुई थी। भारत ने 2012 के बाद से हर सीजन में कई मेडल जीते हैं। इस बीच भारत की सिर्फ पीवी सिंधु ही गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब रही हैं। किदांबी प्रकाश ने इस साल गोल्ड मैडल जितने से बस एक कदम दूर थे। हालांकि उन्हें सिल्वर मेडल ही मिल पाया।

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पूर्व खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण को विश्व चैंपियनशिप में भारत को पहला पदक दिलाने का श्रेय जाता है। प्रकाश पादुकोण ने 1983 में कोपेनहेगन में भारत के लिए कांस्य पदक जीता था। सेमीफाइनल में वह चीन के स्वे किंग से हारे थे।

पीवी सिंधु वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत की सबसे सफल खिलाड़ी रही हैं। उन्होंने अब तक कुल पांच मेडल जीते हैं। वह 2013 और 2014 में सेमीफाइनल में हारने के बाद कांस्य पदक जीता था। वह 2017 में फाइनल में पहुंची थी। जहां उसे ओकुहारा ने हराया था। वहीं, 2018 में फाइनल में कैरोलिना मारिन से उन्हें हार का सामना पडा था। दो रजत पदक जीतने के बाद, पीवी सिंधु आखिरकार 2019 में भारत की पहली विश्व चैंपियन बनीं थी। उन्होंने बेसल में नोजोमी ओकुहारा को हराया था।

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भारत के युवा स्टार लक्ष्य सेन ने, इस साल पहली बार विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लिया हैं। उन्होंने पहली बार में ही कांस्य पदक जीता हैं। लक्ष्य सेन सेमीफाइनल में किदांबी श्रीकांत से हार गए थे। पुरुष एकल में भारत का यह तीसरा कांस्य पदक है।

भारत के बेहतरीन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत इस साल की विश्व चैंपियनशिप में पुरुष एकल के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। उन्होंने देश के लिए एक रजत पदक हासिल किया है।

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