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किसानों के घर लौटते ही, खाली हुआ गाजीपुर बॉर्डर, आज से यातायात होगी शुरू

नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन विवादस्पद कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहा आंदोलन आखिरकार ख़त्म हो चूका है। सरकार द्वारा तीन कृषि कानून हटाए जाने के बाद यूपी के गाजीपूर बॉर्डर पर एक साल से अधिक समय से चल रहा किसानों का धरना आंदोलन, आखीर समाप्त हो गया है। किसान अब अपने अपने घरों के लिए निकल पड़े है । पुलिस के मुताबिक गाजीपुर बार्डर  मरम्मत और मलबा हटाने के बाद सभी वाहनों के लिए खुला कर दिया जाएगा।

सिंघू सीमा पर छोटे वाहनों की आवाजाही के लिए दोनों कैरिज-वे के अभी तक 3 लेन खोल दिए गए हैं। अभी पांच लेन की मरम्मत तेजी से की जा रही है। काम पूरा होते ही तुरंत इसे भी खोल दिया जाएगा। जिसके बाद छोटे वाहनों के साथ-साथ भारी और बडे वाहनों की आवाजाही भी पूरी तरह से संभव हो सकेगी।

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इसका मतलब अब लगभग १ साल से बंद पड़ा हायवे अब यातायात के लिए खुला हो गया है। अब ऐस हावे से सभी प्रकार की गाड़िया सफर कर सकती है।

राकेश टिकैत ने लिया फतेह मार्च का नेतृत्व 

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राकेश टिकैत किसानों का नेतृत्व करने वाले प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्होंने  इस आंदोलन में किसानों का पूरा साथ दिया। वह किसानों के साथ डटे रहे। इस वजह से उन्हें फ़तेह मार्च का नेतृत्व करने का मौका मिला।

युपी के फतेह गेट से निकलने से पहले किसानों ने किसान नेता गौरव टिकैत, मीडिया प्रभारी शमशेर राणा होशियार सिंह और अन्य किसानों की मौजूदगी में पूजा, हवन किया गया। बीकेयू के राष्ट्रीय नेता और प्रवक्ता राकेश टिकैत भी गाजीपुर सीमा पर पहुंचे। जिन्होंने किसानों के फतेह मार्च का नेतृत्व भी किया, और मुजफ्फरनगर के लिए तुरंत रवाना हो गए।

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देशभक्ति के गीतों पर नाचते दिखे किसान

राकेश टिकैत ने कहा कि 13 महीने के अथक संघर्ष के बाद किसानों का सम्मान वापस लौटा है। युवाओं को अपनी बात कहने की खुली आजादी है। आंदोलन अभी भी खत्म नहीं हुआ है। भारत सरकार के साथ एक समझौते के आधार पर आंदोलन कुछ दिनो के लिये स्थगित कर दिया गया है।पूजा,हवन समाप्त होने के बाद किसानों ने अपना बैग और सामान पैक किया, और एक-दूसरे से मिलकर अपने घर वापस लौट गए। फतेह मार्च से पहले किसानों ने देशभक्ति के गीतों पर जमकर नृत्य भी किया।

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