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कोरोना वैक्सीन के बूस्टर डोज का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं, ICMR के महानिदेशक का दावा

नई दिल्ली : ICMR के प्रमुख डॉ. बलराम भार्गव ने कहा है कि, “अभी तक इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि कोरोना वायरस बीमारी (COVID-19) से बचाव के लिए वैक्सीन की बूस्टर खुराक की जरूरत है।”

ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ) के महानिदेशक (DG) ने आगे कहा, “कोविड -19 वैक्सीन की दूसरी खुराक सभी वयस्कों को दी जा रही है और सभी को दोनों दोस मिले यह सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।”

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ऐसे में केंद्र कोई सीधा फैसला नहीं ले सकता।

हाल ही कुछ के दिनों में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत कई लोग केंद्र सरकार से बूस्टर डोस को मंजूरी देने की गुहार लगा रहे हैं। ICMR का कहना है कि वर्तमान में लक्ष्य जनसंख्या का पूर्ण टीकाकरण करना है। यह हो जाने के बाद बूस्टर पर निर्णय लिया जाएगा। हमारे पास पर्याप्त स्टॉक है।

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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 94 करोड़ पात्र वयस्कों में से, लगभग 82 प्रतिशत ने अपनी पहली कोविड -19 खुराक  ली है, जबकि लगभग 43 प्रतिशत ने दोनों खुराक ली हैं। 

अगले हफ्ते एनटीएजीआई की बैठक होगी

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केंद्र सरकार का एक पैनल दो हफ्ते में देश में बच्चों के लिए वैक्सीन और बूस्टर डोज पर नीति तैयार करेगा। टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) की अगले सप्ताह बैठक होगी। माना जा रहा है कि इस बैठक में कोविड-19 वैक्सीन की अतिरिक्त खुराक यानी बूस्टर डोज उपलब्ध कराने के लिए व्यापक कार्य योजना तैयार की जा सकती है।

कोरोना पीड़ित बच्चों का टीकाकरण जनवरी में शुरू हो सकता है। अन्य सभी बच्चों का टीकाकरण मार्च तक शुरू हो सकता है। सरकार इस समय हर घर दस्तक अभियान के जरिए सभी लोगों को दोनों कोरोना के टीके देने की तैयारी कर रही है।

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