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शीतकालीन सत्र से ठीक पहले प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार सुबह सर्वदलीय बुलाई बैठक

नई दिल्ली : कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की थी। हालांकि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। अभी भी किसानों का एक वर्ग आंदोलन जारी रखे हुए है। इस बीच, प्रधान मंत्री ने अगले रविवार, 26 नवंबर को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। वह रविवार को सुबह 11 बजे सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करना चाहते हैं। 

संसद का शीतकालीन सत्र अगले सोमवार से शुरू हो रहा है, और उससे ठीक पहले प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक को राजनीतिक गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है। बैठक में तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की प्रक्रिया को विशेष महत्व देने की उम्मीद है। वहीं, किसान फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए कानून की मांग कर रहे हैं, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सर्वदलीय बैठक में चर्चा हो सकती है। 

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सर्वदलीय बैठक के बाद शाम को भाजपा संसदीय कार्यकारिणी की बैठक होगी।  पहले सुनने में आया था कि दोपहर 3 बजे तक एनडीए दलों के प्रतिनिधि भी बैठक में बैठ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक रविवार को इन सभी बैठकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रह सकते हैं। 

आगामी शीतकालीन सत्र में तीन कृषि कानूनों को वापस लेना सबसे अहम मुद्दा होने जा रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल बुधवार को विधेयक को मंजूरी दे सकता है। केंद्र द्वारा अपने फैसले की घोषणा के बाद से विपक्षी दल तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने पर जोर दे रहे हैं।

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विपक्षी दल केंद्र पर किसानों की अन्य मांगों को स्वीकार करने का दबाव बना रहे हैं। एक अन्य मुद्दा फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने वाला कानून है। इस बीच विरोध कर रहे किसानों के एक वर्ग ने यह भी कहा कि जब तक यह मांग पूरी नहीं होती तब तक वे धरना जारी रखेंगे।

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