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अफगानिस्तान: भारत-अमरिका ने आतंकवाद को रोकने के लिए तालिबान को अपील, जानिए विस्तार से

वॉशिंगटन DC : अफगानिस्तान की सत्ता अब तालिबान के हाथ में है।  सत्ता में आने के बाद से अफगानिस्तान के नए शासकों पर कई आरोप लगते रहे हैं। दुनिया के कुछ सबसे शक्तिशाली देशों ने तालिबान खिलाफ आवाज उठाई है। उनका मानना है कि  अफगान भूमि का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

आतंकवाद के लिए अफगान धरती का न करे इस्तेमाल 

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गुरुवार को, भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक बार फिर तालिबान से आह्वान किया कि वह किसी भी अन्य देश में आतंकवादी गतिविधियों या हमले की साजिश को अंजाम देने के लिए किसी भी तरह से अफगान धरती का इस्तेमाल न करे।

भारत-अमेरिका ने जारी किया संयुक्त बयान 

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आतंकवाद से निपटने पर भारत-अमेरिका की आठवीं बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में यह अपील की गई। बयान में सीमा पार आतंकवादी हमलों को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। नवगठित तालिबान सरकार को अभी तक अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली है। भारत और अमेरिका जैसे दुनिया के कई ताकतवर देशों की आपत्तियों (Objections) में यह मान्यता आज भी अटकी हुई है।

अफगानिस्तान की आड़ पाकिस्तान को भी सन्देश 

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बयान में आगे कहा गया है कि अफगान सरजमीं पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होना तालिबान सरकार को मान्यता मिलने के खिलाफ होगा। जानकारों का मानना ​​है कि सीमा पार से हुए आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को भी यह संदेश दिया गया है।  क्योंकि पाकिस्तान पर बार-बार आतंकी गतिविधियों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं।

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें 2008 के मुंबई हमलों की याद दिला दी गई है। इस भीषण आतंकी हमले में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने पाकिस्तान से सीमा पार कर भारत में प्रवेश किया और पता चला कि उन्हें इस आतंकी हमले में पाकिस्तान से तमाम निर्देश मिले थे।

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दोनों देशों को लगता है कि अभी तक आतंकवादी हमले की उचित सुनवाई नहीं हुई है। हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद कथित तौर पर नवंबर 2020 में दोषी ठहराए जाने के बाद भी पाकिस्तानी हिरासत में है। हमले को अंजाम देने वाले जकीउर रहमान लॉकवी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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